मज़बूरियाँ देर रात तक जगाती है…!
और जिम्दारिया सुबह जल्दी जगाती है..!!

“सब्र इतना रखो कि इश्क बेहूदा ना बने,
खुदा मेहबूब बन जाये पर मेहबूब खुदा ना बने।”

प्रेमसार

अच्छे सभी होते हैं,
पर उनकी परख बुरे वक़्त में होती है।

प्यार कहो तो …
दो लफ्ज…
मानो तो बंदगी…
सोचो तो गहरा सागर…
डूबो तो जिंदगी…
करो तो आसान…
निभाओ तो मुश्किल…
बिखरे तो सारा जहां …
सिमटे तो सिर्फ …
तुम!!

सबको अपने साथ सात ‘स’ की शक्ति लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
ये हैं-
पहला- सेवाभाव,
दूसरा- संतुलन,
तीसरा- संयम,
चौथा- समन्वय,
पांचवां- सकारात्मकता,
छठा- सद्भावना
सातवां- संवाद।

वो बादशाह था फिर भी रहा सादगी के साथ।
वो था ख़ुदा ज़मीन पे चला आदमी के साथ।।
-जाॅनी लीवर